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16 December, 2013

"नभ में काले बादल छाये" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

मेरे काव्य संग्रह "धरा के रंग" से
 
एक गीत
"नभ में काले बादल छाये"
IMG_1525बारिश का सन्देशा लाये!! 
नभ में काले बादल छाये! 
छम-छम बून्दें पड़ती जल की
कल-कल करती नभ से ढलकी
जग की प्यास बुझाने आये! 
नभ में काले बादल छाये!
IMG_1631जल से भरा धरा का कोना
हरी घास का बिछा बिछौना
खुश होकर मेंढक टर्राए! 
नभ में काले बादल छाये!
IMG_1628पेड़ स्वच्छ हैं धुले-धुले हैं
पत्ते भी उजले-उजले हैं
फटी दरारें भरने आये! 
नभ में काले बादल छाये!

4 comments:

  1. अच्छा बाल-सुलभ गीत है ! सराहनीय है आप की साहित्य-साधना !

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  2. बहुत सुंदर रचना !

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  3. बारिश का सन्देशा लाये!!
    नभ में काले बादल छाये!
    छम-छम बून्दें पड़ती जल की,
    कल-कल करती नभ से ढलकी,
    जग की प्यास बुझाने आये!
    नभ में काले बादल छाये!

    सुन्दर बाल गीत सहज सुबोध बाल शैली

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  4. घनघोर घटा अब छाई है
    नभ ने ली अंगडाई है
    प्यासी धरती प्यासी नदियाँ
    रे बदली तू प्यास बुझाने आई है

    सुन्दर व सुमधुर बाल गीत

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