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15 July, 2010

"चुन चुन गाती चिड़िया" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

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आज से यह ब्लॉग
बाल-चर्चा को समर्पित है!

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सबसे पहले देखिए-



वर्ष की श्रेष्ठ नन्ही ब्लॉगर का ख़िताब अक्षिता (पाखी) को -*आइये आज आपको मिलवाते हैं, लोकसंघर्ष-परिकल्पना द्वारा आयोजित ब्लागोत्सव-2010 में वर्ष की श्रेष्ठ नन्ही चिट्ठाकारा का ख़िताब पाई अक्षिता (पाखी) से.* अक्षिता...

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अब देखिए बचपन को- 



बाल कविता भालू राजा / सुकीर्ति भटनागर भर गर्मी में भालू राजा, हुए बड़े बेहाल। एक तो उनका रंग था काला, और थे ढेरों बाल।। तौबा-तौबा, कितनी गर्मी, बाल तो है जंजाल। भीखू...

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बहुत-बहुत मुबारक पाखी की दुनिया की
निराली अक्षिता (पाखी) को-




'पाखी की दुनिया' के एक साल और खूबसूरत ख़िताबहुर्रे..आपको पता है मेरा ब्लॉग एक साल का हो गया. आज मैं आपके साथ अपने ब्लॉग के एक साल होने की ख़ुशी सेलिब्रेट करूँगीं. 'पाखी की दुनिया' ब्लॉग जून, 2009 मे...

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नन्हे सुमन भी देख ही लीजिए
देख-देख मन हुआ विभोर। 
नाच रहा जंगल में मोर।।
चंचल-चपला चमक रही है, 
बादल गरज रहा घनघोर। 
नाच रहा जंगल में मोर।।
 

इस गीत को आप 
अर्चना चावजी के स्वर में 
सुन भी सकते हैं-
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देखिए तो सही 



Baba I Love You -प्यारे बाबा मेरे बाबा सबसे प्यारे है ... I love you very much Baba - happy fathers day

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यूं तो सावन झूम के बरसा..... -१. यूं तो सावन झूम के बरसा पर एक मै ना भीग पाया, नमी जिसमे थी नहीं वो, बादल मेरे हिस्से में ...
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"एक शहर जो हर शहर में बसता है" और बिहार -2003 में पहली बार घर से बाहर पाँव रखा और दिल्ली कि और निकल पड़ा.. मुनिरका में अपना आसरा बनाया.. हर शहर में एक ही शहर बसता है.. मैंने पाया कि हर शहर में एक ह..

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मुझसे थोड़ी बात करो प्यारी तितली, 
पंख हिलाकर रंगों की बरसात करो! 
बैठो आकर मेरे सिर पर, दर्पण में मैं देखूँगी! 
मैं भी नाचूँ, तुम भी नाचो, मन में ख़ुशियाँ... 
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पसन्दीदा चिट्ठों और वेबसाईट्स की कोई पोस्ट न छूटे : गूगल रीडर गूगल रीडर आपके पसन्दीदा चिट्ठों और समाचार वेब साइटों में प्रकाशित हर नई सामग्री की खबर रखता है । चिट्ठा या साइट पर प्रतिदिन नई पोस्ट प्रकाशित होती हो अथवा ...
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घोड़े को चलाने में आया बहुत ही मजा इधर एक दो दिनों से बारिश हो रही है तो मौसम कुछ अच्छा सा हो गया है। अब गर्मी भी कम लग रही है। बाहर खेलने में भी मजा आ रहा है। हम लोग बारिश में नहीं भीगे। बा... 
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बबल्स का खेलकल मैंने बबल्स से खूब खेला...बार बार मम्मा से बबल्स बनवाती और उन्हें पकडती...फिर मम्मा ने बोला तुम अपने आप से बबल्स बनाओ...बहुत कोशिश करने के बाद मैंने बब..

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आदि स्कुल में..आदि का स्कुल (प्ले ग्रुप) शरू हो गया... पहले कुछ दिन तो मन नहीं लगा पर अब आदि मजे से है.. सुबह थोड़ा नाटक जरुर करता है पर बाद में स्कुल एन्जॉय करता है.. अभ...
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सॉरी मम्मी ................हम लोग बनारस गए थे. बुधवार (७ जुलाई २०१०) को मम्मी, पापा, मै, उद्भव चाचा , बंटू चाचा, पिंकी चाची. तासु और प्रज्ञा दीदी हम लोग boat में बैठे थे. बहुत मस्...

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 अब देखिए

एक प्यारी-सी ब्लॉगपरी

इससे मिलकर आपको मिलेगी - ख़ुशी




लवी का स्वच्छता अभियान -आपको पता है, मैं कितनी सफाई पसंद हूँ ? जरा भी गन्दगी मुझे अच्छी नहीं लगती इसलिए घर पर कहीं भी जरा भी गन्दगी मुझे दिखाई दे, मैं बस वायपर और पानी लेकर पह...
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और अन्त में मिलते हैं-



-हमारा ब्रह्माण्ड यह ब्रह्माण्ड है कितना बड़ा किस ग्रह पर हवा और पानी यह सब कितना आजीब है यह बात है अब हमने जानी पृथ्वी पर ही देखा बस जीवन जहां पर जीने की हर ...
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11 comments:

  1. Thanks a lot for adding my post here.

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  2. अच्छा लगता है सब बच्चो को एक साथ देखना... थैंक्स अंकल :)

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  3. बहुत शुक्रिया अंकल मेरे पोस्ट को आपके चर्चा में देखकर मुझे बहुत खुशी हुई !

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  4. बहुत बहुत आभार आपका !

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  5. सुन्दर चर्चा..

    आभार

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  6. बहुत शुक्रिया!aap ni pakhi ki duniya ko bahut bara bana diya hai.

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  7. "यूं तो सावन झूम के बरसा....."
    is no doubt a good poem but mujhe to esme "BAL KAVITA" jaisa kuch samajh nahi aaya. pl Dr. Roop chandra ji kya aap mujhe guide kar sakte hai, i will be highly obliged to you .

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  8. अरे वाह बाल चर्चा तो बेहद मस्त है।

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  9. बहुत अच्छा लगा आपकी इस बगिया में आकर!

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  10. खुशी हुई यह देखकर कि नन्हे मुन्नों की भी खैर खबर लेना वाला कोई तो है।
    ................
    पॉल बाबा का रहस्य।
    आपकी प्रोफाइल कमेंट खा रही है?.

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  11. मै कहाँ हूँ अंकल ? मुझे तो भूल ही गए

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