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29 October, 2010

“निमंत्रण..” बाल चर्चा मंच-26

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चर्चा मंच पर पोस्ट बहुत ज्यादा हो जाती है!
इसलिए अक्सर नन्हे-सुमनों की
चर्चा का 26वाँ अंक बाल चर्चा मंच
के पटल पर प्रस्तुत कर रहा हूँ!
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आज सबसे पहले आदित्य (Aaditya) का
-रेश्मी जुल्फों का साथ ३ नवंबर को छूटने वाला है.. आमंत्रित है आप मेरे मुंडन समारोह में... दाल-बाटी, चूरमा, गट्टे की सब्जी, बाजरे का सोगरा, मूली की सब्ज...
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अब देखिए BAL SAJAG पर यह कविता  -
मैंने देखा घोंघा मैंने देखा घोंघा , नाम था नकली लॉग....
 पानी में वह रहता था, नहीं किसी से डरता था.....
 तभी वहां आया एनाकोंडा, तुरन्त निकला फोड के अण्डा.......
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नन्हे सुमन में देखिए!
"बन्दर की व्यथा" बिना सहारे और सीढ़ी के, 
झटपट पेड़ों पर चढ़ जाता। 
गली मुहल्लों और छतों पर, खों-खों करके बहुत डराता। 
कोई इसको वानर कहता, कोई हनूमान बतलाता। ...
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*माचिस की तील्लियों को सजा कर निम्न पैटर्न बनाओ* * * * I** 
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संजीव 'सलिल' ने लिखा है 
 (लोस एंजिल्स अमेरिका से अपनी मम्मी रानी विशाल के साथ
 ददिहाल-ननिहाल भारत आई नन्हीं अनुष्का के लिए है यह गीत) 
लो भारत में आ...
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 बाल-मन  पर 
शुभभावना और शुभकामना से परि पूर्ण
-भवानी प्रसाद मिश्र का गीत पढ़िए!

 साल शुरू हो दूध दही से साल खत्म हो शक्कर घी से। 
पिपरमैंट, बिस्कुट मिसरी से रहें लबालव दोनों खींसे।। 
मस्त रहें सड़कों पर खेलें ऊधम कर...
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भी तो देख लीजिए-
 यह देखो मैंने समुद्र के किनारे क्या बनाया. नहीं समझ में आया...
अच्छा ये देखिये. अले वाह, यह तो बन गया...
हुर्रे.अब आप भी देख लीजिये. पहले मैंने रेत का टीला ...
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माणिक  जी बता रहे हैं!
एकदम काला काला सा और भूखा भी अन्तिम घर का नौनिहाल था 
वो घण्टी सुनकर स्कूल आता वेणीराम ले बस्ता,
बुझे मन से चल पड़ता स्कूल बैठता था कुछ देर बारामदे में जी...

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बाल-संसारBAL SANSAR में पढ़िए-
रतन चन्द रत्नेश चश्मा चढ़ाए आंखों पर, बिल्ला जी पढ़ रहे थे अखबार। 
एक खास खबर को वे बांच रहे थे बार-बार। 
तभी रसोई से चीखी बिल्ली, बाद में पढ़ना यह अखबार। बच्चो...
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अनुष्का भारत आ रहीं हैं!
इनका स्वागत कीजिए!
१७ नवम्बर २००७ .....निवार्क एयरपोर्ट से 
आज शाम हम मुंबई के लिए उड़ान भरने वाले है . 
मैं बहुत ख़ुशी ख़ुशी ममा के साथ तैयार हो कर बाहर निकली .....
मुझे बाहर...

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*पंखुरी टाइम्स* का एक अंक पंखुरी बेटी के शब्दकोष के बारे में था, 
आपने ज़रूर पढा होगा.बिटिया के विकास क्रम में शब्द बोलना सीखने 
और खुद नये शब्द गढने की प्रक्...
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और अन्त में-
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माधव कितने खुश हैं अपना कारनामा बता कर!
जिसका शीर्षक ही शैतानी भरा है!
-कल पापा -मम्मी , बड़े पापा के साथ ड्राइंग रूम में बाते कर रहे थे , 
मै दूसरे कमरे में खेल रहा था . 
खेलते खेलते मेरे हाथ पापा की एक कॉपी लग गयी , बस क्या था ...
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5 comments:

  1. बहुत सुन्दर चर्चा नानाजी .....आभार
    अनुष्का

    ReplyDelete
  2. बहुत सुन्दर चर्चा....

    ReplyDelete
  3. मयंक जी, बच्चों के ब्लॉग की चर्चा सिर्फ आप ही करते हैं, इसलिए आपको विशेष रूप से बधाई।

    ReplyDelete

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