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27 September, 2010

"चर्चा बच्चों के ब्लॉगों की-19" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

चर्चा मंच पर पोस्ट बहुत ज्यादा हो जाती है!
इसलिए प्यारे-प्यारे नन्हे-सुमनों की
चर्चाएँ अक्सर छूट जाती हैं!
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आज प्रस्तुत है-
बच्चों के ब्लॉगों की चर्चा का
यह 19वाँ अंक
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शुरूआत करते हैं से
- एक बार की बात है, अब तक हमको याद है. जंगल में थे हम होते, पांच शेर देखे सोते. थोड़ी आहट पर हिलते, आंख जरा खोल देखते. धीरे से आंख झपकते, साथी से कुछ ज्यों क...

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चर्चा में शामिल होने वाला दूसरा ब्लॉग है-
- मुर्गा बोला नहीं जगाता अब तुम जागो अपने आप। कितनी घडियाँ और मोबाइल रखते हो तुम अनाप-शनाप। मैं भी जगता मोबाइल से तुम्हें जगाना मुश्किल है कब से जगा रहा हूँ ...

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अब बारी है सरस पायस की-
- सब्जी ले लो, सब्जी! आलू ले लो, प्याज ले लो, बैंगन ले लो, गोभी ले लो, सब्जी ले लो, सब्जी! हरे-हरे मटर ले लो, लाल-लाल टमाटर ले लो, सब्जी ले लो, सब्जी! अरे-अ...
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- आज से जॉय ऑफ गिविंग वीक (Joy of giving week), शुरू हो रहा है जो 26 September से 2 October,2010 तक चलेगा .सभी को मेरी शुभकामनाएँ की ये प्रोग्राम सफल हो और ...
((((()))))

नन्हे-मुन्हे में देखिए-
- डा० अनिल सवेरा जी की एक अति सुंदर कविता....... *माफ़ी* *बंदर बाबु झुला झुलें,* *लेकिन बंदरिया को भुले.* *बंदरिया हो गई नाराज,* *बोली मै तो लडुंगी आज.* * * *अ....
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-आपको पता है, आज डाटर्स डे (Daughters Day) है.
डाटर्स-डे पर मुझे क्या करना है...
सोचती हूँ आज ममा-पापा को खूब प्यार करूँ.
पर ममा-पापा को तो मैं वैसे भी प्यार...
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हमारे पिताजी उधर खाना खाने के बाद सौंफ जरूर खाते हैं।
उन्होंने एक डिब्बे में सौंफ रखकर पलंग पर ही रख दिया है।
उनकी देखादेखी हमने भी सौंफ खाना शुरू कर दिया ....
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- छुट्टी के हैं हथकंडे, रेनी डे भई रेनी डे। बरखा नहीं निगोड़ी है, गरमा गरम पकौड़ी है। इक्के एक, न दुक्के दो सोमू बोले छक्के छे। पानी बरसे छम छम छम छोड़ो भ...---
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- सुनो-सुनो माताओं और बहनों सुनो-सुनो माताओं और बहनों ।
चोरो और लुटरों से बचकर रहना ॥
अपनी रक्षा खुद ही करना ।
पुलिश को तो है अब कुछ नहीं कहना ॥
उन्हें है अब...
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*नाचा मोर नाचा मोर**
**जंगल में तो मच गया शोर।**
**बादल छाये बिजली चमकी**
**ठंढी हवा चली जंगल में**
**सुंदर पंख फैलाकर अपने**
**लगा थिरकने सुंदर मोर।**
**प...
-घर की बालकोनी से देखा तो पता चला की सामने बेंजाकिटी पार्क (Benjakiti Park) में काफी चहल पहल हो रही थी.. कुछ सजावट भी हो रही थी... देखो कितना सुन्दर लग रह...
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- पता है जबलपुर से लौटने के बाद मैं और भी बदमाश हो गया हूं। आजकल मेरी एक नई शरारत शुरू हुई है और वो है चीज़ों को उठाकर खिड़की से नीचे फेंक देना। उस दिन पाप...

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-हम है नन्हे मुन्ने बच्चे गलतियाँ बहुत ही करते है, दिल न टूटे कभी किसी का इसी बात से डरते है | कभी किसी हमारी गलती से दिल जो आपका हो दुखा, हाथ जोड़ हम ...
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- दादू दादी के इण्डिया चले जाने के बाद मम्मा थोड़ी अकेली पढ़ गई थी . मेरा ध्यान रख कर घर का भी काम देखना
लेकिन विशाल चाचू (पापा के मित्र) और पापा, मम्मा की ब...ल्कु...
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-आज मेरे बाबूजी का happy birthday था..मैंने उनके लिए कार्ड भी बनाया और केक भी...कार्ड तो यह रहा...और पता है केक कैसे बनाया..आप सब भी बना सकते है...simple ...

((((((()))))))

        • और अन्त में देखिए!
6 बेबी सीक्रेट्स! - पढ़िए हम बच्चों के बारें में ६ सीक्रेट्स, जो इस विषय के विशेषज्ञों से बातचीत के आधार पर हैं और आज के राजस्थान पत्रिका में छपी है. नन्हे-मुन्नों की नादानि...

  • (((((())))))

22 September, 2010

"चर्चा बच्चों के ब्लॉगों की-18" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

चर्चा मंच पर पोस्ट बहुत ज्यादा हो जाती है!
इसलिए प्यारे-प्यारे नन्हे-सुमनों की
चर्चाएँ अक्सर छूट जाती हैं!
प्रस्तुत है-
बच्चों के ब्लॉगों की चर्चा का
यह 18वाँ सुमन
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शुरूआत करते हैं के ब्लॉग से
मेरे विद्यारंभ संस्कार के साथ ही औपचारिक रूप से
मेरी शिक्षा की शुरूआत हो चुकी है .
पापा मेरे लिए दो पुस्तकें खरीद लाये है ,
कलम घर पर था ही , बस एक टीचर क...
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चर्चा में शामिल होने वाला दूसरा ब्लॉग है-
मम्मा मेरे लिए काँटा और बत्तख लाई....
मैं चला बत्तख पकडने... है न बिल्कुल अहिंसक तरीका...

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अब बारी है नन्हे सुमन की-
*अतिवृष्टि* जब सूखे थे खेत-बाग-वन,
तब रूठी थी बरखा-रानी।
अब बरसी तो इतनी बरसी,
घर में पानी, बाहर पानी।।
बारिश से सबके मन ऊबे,
धानों के बिरुए सब डूबे, अब ...
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- मैं ना आदित्य साहू हुँ ...क्या आप मेरी कहानी सुनोगे?
मेरा जन्म १० मार्च २००९ में होलिका दहन के दिन हुआ था। मेरे मम्मी पापा उस क्षण बहुत खुश थे पर थोड़े देर ...
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नन्हे-मुन्हे में देखिए-
- बच्चो आप इस ब्लांग पर ज्यादातर डा० अनिल सवेरा जी की सुंदर कलम से लिखी बाल कवितायें पढते है, लेकिन उन से आप का कभी परिचय नही करवाया था, फ़िर एक बार मैने उन ...
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देखो आसमान में उड़ रही पतंगे
देखो भाई कितनी रंग बिरंगी पतंगे ,
उड़ रही आसमान में ये सारी पतंगे....
आसमान में सभी पतंगों को उड़ाते...
जब पतंगे कट जाती हैं, लडके....
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अब मैं दो महीने की हो चुकी थी ....
दादू दादी के साथ मेरे दो महीने कैसे बीते
ना मुझे पता चला न उन्हें ।
वैसे तो दादू दादी को ५-६ महीनो के लिए
रुकना ही था लेक...

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-पिछले दिनों मम्मा-पापा के साथ मायाबंदर घूमने गई
तो वहाँ का करमाटांग बीच भी देखा.
लोग बता रहे थे कि सुनामी ने इस बीच को
काफी नुकसान पहुँचाया. रास्ते में मैं...
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-*प्रियंका गुप्ता* *
[वह कविता मैने तब लिखी थी जब मैं आठवीं में पढ़ती थी ।]
* * ओ मम्मी, ये कैसा युग है*
* कितने रावण जनम रहे हैं*
* राम कहाँ हैं...
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-कंघी करते हुए मेरे भाई के साथ अक्सर ऐसा होता है....
बार-बार कंघी करने के बाद भी बाल खरा ही रह जाता है...
तब वह भी ऐसे ही झल्लाता है...
क्या आप के साथ ऐसा हो...
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- भारत इस वर्ष 3 अक्टूबर से 19 वें राष्ट्रमंडल खेलों का आयोजन कर रहा है। परंपरानुसार इसकी शुरूआत 29 अक्तूबर, 2009 को बकिंघम पैलेस, लंदन में महारानी एलिजाबेथ...

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सुंदर-सुंदर लाल टमाटर खाने को मन करता,
खट्टा-मीठा इसका स्वाद सब का मन है हरता।
मम्मी इसको सब्जी कहती ‘मैम’ है कहती फल,
छोटी बहना मेरी इसको कहती सद...
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चूहा बिल्ली दोस्त बने दोनों खाने लगे चने बिल्ली चूहे को घुमाती पीठ के ऊपर उसे बैठाती चूहा लेकर आता दाने बिल्ली का सब कहना माने रह्ते दोनों हरदम पास हुआ इक...ल्कु...

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-पिऊं दूध और खाऊं मलाई अच्छी लगती मुझे मिठाई थोडा-थोडा बढता जाता हर दिन हीरो बनता जाता
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*उसकी आंखों की*** *पुतलियों में*** *अब नहीं होती *** *कोई हलचल *** *सतरंगे गुब्बारों*** *और लाल पन्नी वाले *** *चश्मों को देखकर।*** *नहीं फ़ड़कते हैं अब*** ...

  • (((((())))))
    • और अन्त में देखिए!
- खोल दिया मेंढ़क टोली ने, हर गड्ढे़ में एक मदरसा।
ढ़िंग्चक ढ़िंग्चक पानी बरसा।
भाँति-भाँति के बादल नभ में, धमा चौकड़ी लगे मचाने।
खो-खो और कबड्डी जैसे, खेलो...

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